।। आज़ादी के वो सैनानी जिन्हें आज शायद ही कोई जानता हो ।।
देश स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारियों में लगा हुआ है 15 अगस्त को देश के उन वीरों को याद किया जाएगा जो इस स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े थे ।
उन्हीं में से एक नाम जो शायद आज किसी को पता न हो "स्व.पंडित रामस्वरूप आर्य मुसाफिर"चन्दौसीका भी आता है ।जिन्होंने कम उम्र में ही आर्य समाज से जुड़ कर आज़ादी की लड़ाई में अपना योगदान दिया ।आप उस दौरान आज़ादी की अलख जागते हुए वर्मा तक गए और अपने ओजस्वी भाषणों के द्वारा जन मानस में नया संचार पैदा किया आप ने लाहौर और कराची की जेलों की कोठरियों को भी देखा था । आर्य समाज के गौ वध आंदोलन में भाग लेकर आपने औरंगाबाद कैम्प जेल को भी देखा था । जहॉ रहकर आपने जेल के बारे में अपने विचार एक नज़्म में भी लिखे ।आप आर्य प्रतिनिधि सभा लखनऊ से जुड़े थे।
जब भारत सरकार ने स्वतंत्रता आंदोलन के सैनानियों को पेंशन देने की घोषणा की तब आर्य समाज चन्दौसी के उस समय के पदाधिकारी स्व.मदन मोहन लाल अग्रवाल (पट्टी वाले)आपके पास पेंशन का फार्म लेकर आये और फार्म भरने हेतु आग्रह किया परंतु आपने सविनय ये कहते हुये फार्म भरने से मना कर दिया कि मैने जो देश सेवा की है उसका ब्याज में देश से नहीं बसूलूंगा । धन्य है ऐसे देश प्रेमी जो निःस्वार्थ देश सेवा कर 85 वर्ष की उम्र में अपने ऊपर गर्ब करते हुए इस दुनिया से चले गए ।अगर हम ऐसे आदर्शों का कुछ हिस्सा भी अपने जीवन मे उतार सके तो यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी ।
औरंगाबाद जेल में उनके द्वारा लिखी नज़्म की कुछ पंक्तियाँ .....
"ये किस का फ़साना है
ये किस की कहानी है
सुनकर जिसे महफ़िल की
हर आँख में पानी है
जलने में मज़ा क्या है क्यों शमए सदाक़त पर
दीवाने पतंगों ने जल जाने की ठानी है
क्या खाक़ लिखें जब की मेहवस में "मुसाफिर" को
दो ज्वार की रोटी है और दाल का पानी है ।
" जय हिन्द "
(सुधीर शर्मा)
9335717674
देश स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारियों में लगा हुआ है 15 अगस्त को देश के उन वीरों को याद किया जाएगा जो इस स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े थे ।
उन्हीं में से एक नाम जो शायद आज किसी को पता न हो "स्व.पंडित रामस्वरूप आर्य मुसाफिर"चन्दौसीका भी आता है ।जिन्होंने कम उम्र में ही आर्य समाज से जुड़ कर आज़ादी की लड़ाई में अपना योगदान दिया ।आप उस दौरान आज़ादी की अलख जागते हुए वर्मा तक गए और अपने ओजस्वी भाषणों के द्वारा जन मानस में नया संचार पैदा किया आप ने लाहौर और कराची की जेलों की कोठरियों को भी देखा था । आर्य समाज के गौ वध आंदोलन में भाग लेकर आपने औरंगाबाद कैम्प जेल को भी देखा था । जहॉ रहकर आपने जेल के बारे में अपने विचार एक नज़्म में भी लिखे ।आप आर्य प्रतिनिधि सभा लखनऊ से जुड़े थे।
जब भारत सरकार ने स्वतंत्रता आंदोलन के सैनानियों को पेंशन देने की घोषणा की तब आर्य समाज चन्दौसी के उस समय के पदाधिकारी स्व.मदन मोहन लाल अग्रवाल (पट्टी वाले)आपके पास पेंशन का फार्म लेकर आये और फार्म भरने हेतु आग्रह किया परंतु आपने सविनय ये कहते हुये फार्म भरने से मना कर दिया कि मैने जो देश सेवा की है उसका ब्याज में देश से नहीं बसूलूंगा । धन्य है ऐसे देश प्रेमी जो निःस्वार्थ देश सेवा कर 85 वर्ष की उम्र में अपने ऊपर गर्ब करते हुए इस दुनिया से चले गए ।अगर हम ऐसे आदर्शों का कुछ हिस्सा भी अपने जीवन मे उतार सके तो यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी ।
औरंगाबाद जेल में उनके द्वारा लिखी नज़्म की कुछ पंक्तियाँ .....
"ये किस का फ़साना है
ये किस की कहानी है
सुनकर जिसे महफ़िल की
हर आँख में पानी है
जलने में मज़ा क्या है क्यों शमए सदाक़त पर
दीवाने पतंगों ने जल जाने की ठानी है
क्या खाक़ लिखें जब की मेहवस में "मुसाफिर" को
दो ज्वार की रोटी है और दाल का पानी है ।
" जय हिन्द "
(सुधीर शर्मा)
9335717674