||साईं बाबा पर इतना बबाल क्यों ||
आज जिस प्रकार से शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी
ने साईं बाबा के बिरुद्ध वाक् युद्ध शुरू किया है वो कदापि उचित नहीं है शंकराचार्य
जी जिस प्रकार से अनुचित को उचित और उचित को अनुचित बनाने में लगे हैं वो
निन्दनिये है | सर्ब प्रथम मैं आप शंकराचार्य जी से यह जानना चाहता हूँ की आप
वेदों में विश्वास रखते हैं अथवा नहीं यदि रखते हैं तब मैं आप से कुछ प्रश्नों के
उत्तर जानना चाहता हूँ ( मैं आपको यह बतादूं की मैं कोई साईं भक्त नहीं अपितु वैदिक
धर्म को मानने बाला भारतीय हूँ )
(१)-जब वेद कहता है की न तस्य प्रतिमा अस्ति अर्थात उस
परमात्मा की कोई प्रतिमा नहीं है तब आप किस आधार पर मूर्ती पूजा का समर्थन करते
हैं |
(२)-परमात्मा निराकार है और वो जीवन म्रत्यु के बंधन से भी
मुक्त है तब आप किस प्रकार से किसी की भी मूर्तियों को परमात्मा मान सकते हैं |
(३)-वेद के अनुसार अहं बह्मास्मी (अर्थात मैं ही ब्रहम हूँ)
सभी शरीरों मैं स्थित आत्मा को परमात्मा ही माना जाता है , जब सारे शरीरों मैं उस
परमात्मा का निवास है तब साईं बाबा में क्यों नहीं था क्या वो बिना आत्मा के ही
जीवित रहे |
(४)-जब आपने राम को नहीं देखा कृष्ण को नहीं देखा साईं बाबा को
नहीं देखा तब आप किस आधार पर यह कह सकते हैं की अमुक भगवान है अमुक नहीं |
(५)-क्या यह प्रचार करके आप अपने को धर्म का ठेकेदार
प्रचारित नहीं करना चाहते हैं |
(६)-क्या आज जो दशा धर्म की हो रही है,समाज भटक रहा है धर्म के नाम पर पाखण्ड हो रहे हैं उसके लिए आप जैसे
धर्माचार्य दोषी नहीं है जिन्होंने समाज को कोई सही दिशा नहीं दी |
(७)-क्या आज मानवता तार-तार नहीं हो रही
है यदि हाँ तब कृपया बताएं की आप मानबता की रक्षा एक शंकराचार्य होने के नाते
ईमानदारी से कर पा रहे हैं |
(८)-बसुधैव कुटुम्बकम के बारे मैं आप का
क्या विचार है | आपस में भाईचारा बनाने के लिए आपको क्या सभी धर्मो के धर्म गुरुओं
को साथ लेकर नहीं चलना चाहिए |
(९)-क्या आपको वेदों का प्रचार प्रसार
करने हेतु आगे नहीं आना चाहिए था और ये की इस कार्य के लिए आपने कितनों को वेदों
का ज्ञान दिया यदि नहीं तब आपको साईं बाबा की आलोचना करने का भी कोई अधिकार नहीं
है, यहाँ तो आजकल अनेकों ऐसे हैं जो अपने को भगवान और साक्षात् देवी का अवतार
कहलवा रहे हैं उनके प्रति आप का क्या मत है और उन को रोकने के लिए क्या कभी आप ने
उनसे शात्रार्थ किया है |
(१0)-शंकराचार्य जी यदि
आप वेद के आधार पर शात्रार्थ करेंगे तब आप की स्थिति क्या होगी क्योकि वेद किसी भी प्रकार की मूर्ती
पूजा की अनुमति नहीं देता है ऐसे में केवल साईं बाबा की मूर्ती पर ही आपने विवाद
क्यों उठाया हुआ है अन्य पर क्यों नहीं |
मैं शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी
से ये आशा करता हूँ की आप मेरे इन प्रश्नों का उत्तर मेरी जिज्ञासा को शांत करने
के लिए अवश्य ही देंगे |
(सुधीर कुमार शर्मा )
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